Friday, 27 February 2015

''ofcourse I love you''


                                                                               ‘’ओफ्कोउर्स आई लव यू’’

यूँ कभी सोचती हूँ कि एक बिमारी जो आज मेरे हर दोस्त,मेरे आसपास लगभग हर किसी को हैं, वही मुझे और गरिमा को क्यों नहीं है|कभी सोचती हूँ कि कॉलेज में इतने लड़कियों के होने के बावजूद गरिमा में ऐसा क्या था जिसने उसके और मेरे बिच में अलग ही रिश्ता कायम कर रखा है|कई बार सोचने पर मुझे उससे और मेरे मन से सिर्फ एक ही जवाब मिलता है,कि हमारी दोस्ती इसलिए अच्छी हैं क्योंकि हम दोनों एक जैसे हैं,हमारी सोच एक डाल के दो चिड़ियाँ की तरह हैं जिसे कोई चिड़ा उड़ा न पाया हो|

चिड़ा से याद आया एक बार मैं भी फसने वाली थी| पर वह चिड़ा और मेरे बिच मेरे सेल्फ रेस्पेक्ट की दिवार थी,और आज की मांग जैसे घंटो एक दूसरे से बातें करना,चैट करना,कहीं जाने और आने से पहले उसकी डिटेल अदा करना और कभी न कर पाए तो झगड़ा और फिर क्या’’ओफ्कोउर्स आई लव यू’’यह सारी बातें न करके उसे मेरे दुर्गा रूप का व्याखान मिल गया और बिचारा एक दिन बाद ही मेरे डाल से नीचे उतर गया| आज कल समझ नहीं आता लोग फ्रेंड होते हुए भी पता नहीं फिर क्यों किसी दिन पूछ लेते हैं,क्या आप मुझ से फ्रेंडशिप करेंगी? ये फ्रेंडशिप शब्द अपने आप में ही बड़ा उत्तम दर्जे का शब्द है,जो उन्ही को समझ में आता है जो इसमें लिप्त होते हैं| भैया ,हम तो गंगा किनारे वाले हैं, जिन्हें सिर्फ यारी और दोस्ती समझ आवत है|

आज कल गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड होना अपने आप में एक सोशल स्टेटस हैं जहाँ अगर किसी का इस सोशल साईट पर पेज न हो तो लोग उसे या तो झूठा या फिर रेट्रो समझते हैं| आजकल मानो हर तरफ एक बर्निंग ट्रेन चल रही हैं ,पार्टी हो या फेसबुक स्टेटस हर कोई सिंगल से डबल होने की होड़ में हैं|इसके लिए हर तरफ,हर कोई महनत कर रहा है | कोई राहुल फेसबुक पर टाइम इन्वेस्ट करता हैं तो कोई सीमा वात्शाप पर अपनी मैथ्स इम्प्रूव करती है,तो कोई बंटी क्लास सिक्स से ही, इस मामले में सिक्सर मार कर अभी से ही सेफ खेलना चाहता हैं मानों यह प्यार नहीं, प्रधानमंत्री जन धन योजना हो ,जिसमे जो जितनी जल्दी अकाउंट खुलवायेगा वो उतना गौरान्वित फील करेगा| पर अपने लल्लन पाठक जैसे आशिक आज भी वह परानी आशिकी को जारी रखते हुए, रोड़ रोमियो बनकर ही अपने जूलिएट को ढूंड रहे हैं  तो  उनके दोस्त लड़कियों के घर के बाहर से ही नाम पुकारकर,गालियों की रशीद पा खुश हो जाते  हैं|

प्यार की यह सभी कहानियां मुझे अच्छी तो लगती हैं पर सच्ची नहीं| हम बीस के होते नहीं की बीस लोगों से सो कॉल्ड रिलेशनशिप बना लेते हैं,और उस पर आशिकी और रान्झाना जैसे फिल्मों के भरी भरकम डायलॉग दिए जाते हैं|पर इन सब पे मेरा तो एक यही डायलॉग है’’प्यार न हुआ की यूपी.ए. सी का एग्जाम हो, जिसमे मानो यह लोग हर साल एक नयी कमिटमेंट और लड़की के साथ ट्राई देते हैं और जब क्लियर कर पाते नहीं , फिर नए साल ,नए सब्जेक्ट यानी नई लड़की के साथ ट्राई देने चले आते हैं|’’और अगर कोई डटा भी रहा हो तो उनमे मुझे एक दूजे  के लिए प्यार कम और अंधविश्वास ज्यादा नज़र आता है|जैसे उसके पास मेरे लिए वक़्त नहीं रहा,वो कहीं किसी और के साथ तो नहीं,इत्यादि| कुछ लोग तो जहाँ अपने माँ बाप के कहने पर नहीं बदलते, वो दो दिन के प्यार के अकार्डिंग बदल जाते हैं,जैसे मेरी एक दोस्त अब जिन्स से सूट पर आ गयी है,तो दूसरी को अब गुस्सा कम और प्यार ज्यादा आता है|मानो इनको प्यार नहीं डायबिटीज हो गयी हो जिसमे इनकी सारी की सारी डाइट ही बदल गयी हो|

मैं यह नहीं कहती की प्यार गलत हैं,पर हमारा तरीका शायद गलत है,जिसमे प्यार कम और लोग परेशां ज्यादा करते हैं |प्यार कभी हमारी मज़बूरी नहीं होती,प्यार कमिटमेंट साथ रहने का नहीं साथ महसूस करने का होता है| प्यार हमारे सिर्फ अच्छाइयों के साथ जीने से ज्यादा,एक दूसरे की बुराईयों का साथ हैं|बार बार खबर लेने और देने से ज्यादा ख़बर रखने का साथ हैं और हमारा ‘’प्यार’’,हमारी गर्लफ्रेंड और हमारा बॉयफ्रेंड होने से ज्यादा एक साथी होना चाहिए, जिसके साथ रिश्ते टूट भी जाये तो लौट आने की उम्मीद  हमेशा कायम रहे और जिसे हमें हर वक़्त कहना न पड़े’’ओफ्कोउर्स आई लव यू’’|  

Saturday, 21 February 2015

मेरी व्यथा (एक शिकायती ख़त )


                  मेरी व्यथा(एक शिकायती ख़त)

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

                       नमस्कार| कल मैंने और मेरे समाज ने आपका भाषण सुना, आप हमें घरों से लेकर शहरों तक से निकालने की बात कह रहे थे|पर उस वक़्त हमारी हिम्मत और भी टूट गयी जब आपके इस खिलाफ़त आन्दोलन का,इस शाजिश का सभी ने तालियों से स्वागत किया |

पर आज मैं आपसे एक प्रश्न पुछना चाहता हूँ कि जब मैं आपके शरीर,समाज और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हूँ तो आप मुझे कैसे जड़ से ख़त्म कर पायेंगे? पहले तो लोगों से मुझे घर से बेदखल कर दिया,फिर किसी कूड़ेवाले ने मुझे वीरान जगह छोड़ दिया, नगर निगम ने शहर से निकल दिया,पर आप ही बताये, हम जाये, तो कहाँ जाये? इतना ही नहीं आपके नमामि गंगा ,सफामी यमुना जैसे मुहिमों ने हमें घृणा की वस्तु बना दी है| मेरे अकेलेपन का यह आलम है की अब तो मेरे प्रिय मित्र झाड़ू ने मेरे वाटसेप नंबर को ब्लॉक और फेसबुक से अनफ्रेंड कर दिया है और इसकी वजह आप नेता है, जो उसे वी.आई.पी बनाकर सफाई की जगह जयकारे लगाते हैं|

आप कहते हैं कि आप प्रधानमन्त्री नहीं प्रधानसेवक हैं, तो हमारी भी एक सेवा करिए|जिस प्रकार जातिगत राजनीति आप के समाज का एक प्रमुख वोट बैंक है,उसी प्रकार आप हमें भी वर्गीकृत कर दीजिये| प्रायः प्लास्टिक जाति की यह शिकायत रहती है कि उन्हें मल-मूत्र के साथ रखा जाता है,और कांच परिवार की शिकायत रहती है कि उन्हें नाले ,छिलके ,जूठन आदि के साथ रख दिया जाता है| इसलिए हमारे और हमें उठाने वाले उन बाल कबाड़ियों के लिए,हमें बायोडिग्रेडेबल,नॉन बायोडिग्रेडेबल या फिर ड्राई और नॉन ड्राई जाती बना कर अलग अलग कूड़ादान प्रदान करें|ताकि सबके लिए अलग अलग स्कूल ,कॉलेज,दंड और मृत्यु हो|

आखिर में, मैं कूड़ा आपसे से विनती करता हूँ कि हमें भी मेक इन इंडिया में जगह दे,क्योंकि हम तो पहले से ही ‘मेक इन इंडिया’, ’मेड बाई इंडिया’ , ‘यूज़ड बाई इंडिया’ और ‘थ्रोन बाई इंडिया’ है |हमारा महत्व समझिये क्योंकि हर कूड़े का ढेर अपने आप में बदलती सभ्यता का इतिहास है| कैडबरी ने किटकेट को कब हराया,लत्ते दायेपर्स कब बन गए और कब गर्ल्स डीयो ने बॉयज डीयो के साथ बटवारा कर लिया,इन सबका ओपिनियन पोल मैं ही तो हूँ|

अतः मेरी देश भक्ति पर प्रश्न चिन्ह न लगाते हुए, मेरी व्यथा समझने की कृपा करे| आशा करता हूँ कि हमें संयुक्त राष्ट्र तक नहीं जाना पड़ेगा और कूड़ा समाज के लिए आप जल्द ही अच्छे दिन लायेंगे|

सधन्यवाद,
आपके प्रिय अभियान का मुख्य कारण
   ‘कूड़ा’