Wednesday, 19 October 2016

माँ मुझे मत बांधों


पैज़ेब ,पायल ,चूड़ियाँ तुमंने बना ली हैं ,

मुझे कंगनों  से मत लादो,

किसी स्वार्थी लक्ष्य से मत साधो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

माना कि मन मर्ज़ी मैंने कर ली है ,

विरासतों को तिलांजलि दे दी है ,

अपनी उम्मीदों से मत लादो,

माँ मुझे मत बांधों |

 

मुझे नहीं बनना किसी साजन की सजनी ,

न किसी राजन की रजनी ,

मुझे प्रेमी रहने दो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

छाती छुपाने के लिए दुपट्टा ओढ़ लूँ,

ससुराल में सर ढ़क लूँ ,

मुझे किसी पिअरी से मत बांधों ,

बोझिल सिन्दूर से मत लादो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

माँ क्यों तुम मुझे विदा नहीं कर देती,

मेरी अरमानों के आँचल में ,

तारे टाक कर,विश्वास कर लेती

मुझे स्वच्छंद नीलाम्बर घोषित कर दो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

कुछ न दो ,बिंदिया ,बिछिये से मत बांधों ,

दहेज़ की बोली से मत साधो

अरमानों से मत लादो

माँ मुझे मत बांधों |     

Sunday, 25 September 2016

शहाबुउद्दीन यानि - एके छप्पन, सैयां वीरप्पन ,बोल बा त मार देब गोली


        शहाबुउद्दीन यानि - एके छप्पन, सैयां वीरप्पन ,

                          बोल बा त मार देब गोली

शहाबुद्दीन जब जेल से निकाला तो बैकग्राउंड में बस इसी गाने की कमी थी |... एके छप्पन सैंया वीरप्पन  ,बोल बा त मार देब गोली .......बुआ कसम सच में क्या बमप्लाट सीन होता|

बारह साल बाद जब कोई कैदी जेल से निकलता है तो उसके चहरे पर कोई प्रायश्चित तो कम से कम होता ही है पर शहाबुद्दीन जेल से बाहर आया ऐसे ठसके से मानों संसद से सीधे दन दनाते चले आ रहे हों | मीडिया की मानें तो इस बाहुबली को लाने सौ सवा सौ गाड़ियाँ भी गयीं थी इससे पता चलता है कि बाहुबली बनाये नहीं जाते पालें जाते हैं |

शाहाबुद्दीन का नाम मई में सिवान के हिंदुस्तान ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या के बाद उछला और अब उनके रिहा हो जाने के बाद मेरे इस लेख में |लेख में एक छोटा सा सुलेख आपलोग ई जानिय कि राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारणी के सदस्य मोहम्मद शहाबुद्दीन को एक से लेकर दस साल तक की सजा ट्रायल कोर्ट सुना चुकी है | दो मामलों में आजीवन कारावास तक हुई पर अब उपरी अदालत में उसकी चुनौती के कारण फैसला वेटिंग लिस्ट में पड़ा है| फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने से पहले वो आज़ाद है | न्यायिक प्रक्रिया की स्पीड जितनी भी तेज हो पर मज़ा तो यह देखने में आयेगा कि लालू और नीतीश की इस प्रक्रिया में उंगली बाजी करने की स्पीडवा कितनी तेज़  होती है |

अजीब बात यह है कि  37 मामलों में शहाबुद्दीन के पेश न होने से ट्रायल शुरू नहीं हुआ पर हाई कोर्ट में एक के बाद एक मामले में जमानत शुरू होने लगी | शहाबुद्दीन जब अन्दर हुआ तो सत्ता में बीजेपी और जेडीयू थी और आज जब बाहर हुआ तो राजेडी और जेडीयू  और मुख्यमंत्री बोले तो अपन के नीतीश बाबू| जेल से निकलते ही लालू के सैंया वीरप्पन बोले लालू ही हमारे नेता है और होना भी तो चाहिए क्योंकि चोर चोर मौसेरा भाई |

बिहार की राजनीती यहीं समझ में आती है | अनन्त सिंह को नीतीश नहीं छोड़ते और शहाबुद्दीन को गिरिराज ,और उधर अमित शाह बनाम शहाबुद्दीन का एक और बकलोली मैच उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व बीजेपी खेल रही है| कुल मिलाकर शहाबुद्दीन बिहार की राजनीती में हिट चल रहे हैं| मुद्दा अभी और उछलेगा, नितीश और मूक रहें शायद पर प्रश्न यह है कि शहाबुद्दीन जो एक भयावह दौर का प्रतीक रहा है कोई अब यह नहीं देखेगा कि बिहार के मुसलमानों ने भी शहाबुद्दीन को गिरा ,लालू के ख़िलाफ वोट किया था अब सब यह भूलकर यही सोचेंगे कि नीतीश के तथाकथित मंगल में अब क्या नया जंगल होगा ? धुर्वीकरण की राजनीती अब किस ओर जाएगी? पर फ़िलहाल वही दौर याद आ गया ,’’ शहाबुद्दीन – यानि एके छप्पन सैंया वीरप्पन ,बोल ब त मार देब  गोली’’            

Monday, 8 August 2016

shamshaan

रात ढलती जा रही है ,
मानों कोई राह हो, शहर से  शमशान तक
शाम ढलती जा रही है ,
शहर से शमशान तक |
  वह चादर हर शाम मुझे उढाता है ,
  मानों , जाना है मुझे  शर्द में विरान तक ,
  दिल ठहरता जा रहा है ,कट रहा है रास्ता, शहर से शमशान तक|
अब शिकायतें मायने नहीं रखती ,
बेअसर है दुआ रहनुमां तक ,
यह लोग बदलते जा रहें हैं ,
सब सफ़र में हैं ,
शहर से शमशान तक |
   विरान ,शमशान बड़े शान से बढ़ रहा है |
   मतलबी इंसान तक ,
   भयभीत तन सिकुड़ रहा है ,
 मानों यात्रा में है यह शहर , शहर से शमशान तक |
 
 

Saturday, 2 July 2016

गंतान्त्त के आगे


हमारा प्रेम अब गतांक के आगे का प्रेम हो चला है| जैसे एक प्रेमी या पति या पत्नी के साथ जो गत अनागत साल के बाद का तलाक उसके बाद एक नयी शुरुआत यानी गतांक के आगे |......

पिछले दिनों मैं ‘द हिन्दू’ अख़बार में एक लेख पढ़ रही थी जो की इन दिनों तलाक  के बढ़ते केस पर लिखी गई थी | भारत में रोजाना 100 डिवोर्स केस फाइल होते हैं | अमेंस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस सालों में भारत में डिवोर्स के केस में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है| अजीब बात तो यह हैं की यह केसेस घरेलु हिंसा या दहेज़ पताड़ना के कारण नहीं है | रिपोर्ट के अनुसार ये केस लोगों में आपसी भरोसे के कम होने ,एक दूसरे के माँ बाप की ज्यादा दखलांदाजी,या उनकी अवहेलना या अनादार करने के कारण बढ़ रहे हैं ,और सबसे बड़ा कारण  कम अवधि के प्रेम के बलबूते अपना अवधपुरी बसाना और वक़्त के साथ बेवक्त होते एगोइस्टिक झगड़े करना  और क्या विरह यानी  रिश्ते का स्वाः|

यह सच भी है . इन दिनों मेरिटल अफेयर्स जैसे वाहियात शब्दों ने रिश्तों हो गंधौला कर दिया हैं . अपने आप को देखिये हमारा प्रेम अब आशिकी 2 ,से 2 स्टेट होते हुए हाफ गर्लफ्रेंड हो चुका है | प्यार प्राइड and प्रेज्यूडिस से होते हुए , लव हैपन्स ट्वाइस के रास्ते हेट स्टोरी बन कर रह जाती है और हम कहते हैं “ I TOO HAD A LOVE STORY”. हमारे प्यार का भी devaluation हो गया है .ऐसा लगने लगा है की हमारे रिश्तों में भी सावधान इण्डिया,एकता कपूर का ड्रामा चल रहा हैं | सच में भारत में असहंसुत्ता बढ़ गई है और कानूनों का इस्तेमाल होने लगा हैं |पीछले  दिनों हमारे चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के आँखों से पेंडिंग केसों ने आशुं निकाल दिए और ऐसे ही लोगो के डाइवोर्स केस बढ़ते चले गए तो मुझे लगता है  कुछ दिनों में सभी कोर्ट के जज भी रो देंगें | दुनिया की छोड़िये क्या ऐसे लोगों को अपने बच्चों पर भी दया नहीं आती |नजाने क्या हो रहा है हम ज्यादा पढलिख गए हैं, आज़ाद हो गए है या सभ्य बनकर सभ्यता की भयता बढ़ा रहे हैं | टैगोर के जोगर बाली की प्रेमिका अब शायद दुनिया में कहीं नहीं रहीं. धर्मवीर की सुधा और चंदर सा गुनाहों का देवता दुनिया में शायद ही कही हों , न हमरा प्यार हमारा विश्वास हैं, न हमारी हिम्मत, और न विरह हमारी प्रेरणा | हमारा प्रेम आज स्टेटस का मोहताज है, किसी मुकाम का मोहताज है, जो किसी मुकाम से शरू होता है और किसी मुकाम पर जा कर खत्म हो जाता है | प्रेम तो कभी अकड़ की कहानी न थी,यहाँ तो बस झुकाव ही झुकाव होता है .कोई शर्त नहीं होती ,न कोई स्वार्थ | सच में हम खोखले हो गए हैं |  

अब कोई कहा गाता है वह गीत कि’’ बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने ,हमारी थोड़ी से बेवफाई ‘’|अब तो लोग अकसर “पिया न रहे मनबसिया “गाते नज़र आते हैं | वाह रे दुनिया ! विरह को भी अपना व्हात्सप्प का स्टेटस बना डाला | अनुभव के आँगन में आधुनिकता को जगह मिलनी चाहिए पर ये क्या? ऐसी आधिनुकता का क्या फायदा की हम ही खोखले नज़र आयें . अपने रिश्तों को बनाते हुए सोचिये ,वक़्त लीजिये , जरुरत पड़े तो थोड़ी अच्छी फिल्में भी साथ में देख लीजिये , कुछ किताबे झांक लीजिये, सफल जोड़ों की जिंदगी ताक लीजिये | विरह की तकलीफ महसूस कर लीजिये अपने अच्छे दिनों को याद कर लीजिये | माँ बाप और दोस्ती दुनिया के तर्क और वितर्क को तक्किय के नीचे डालिए|  पैसे से ज्यादा प्यार को तवज्जू दें क्यों कि हर चीज की एक लागत होती है और प्रेम की लागत ज्यादा कुछ नहीं  बस कुछ साल, दो मुठ्ठी विश्वास हैं और गंतांत के आगे मिलने की ज़िद|