पैज़ेब ,पायल ,चूड़ियाँ
तुमंने बना ली हैं ,
मुझे कंगनों से मत लादो,
किसी स्वार्थी लक्ष्य से मत
साधो ,
माँ मुझे मत बांधों |
माना कि मन मर्ज़ी मैंने कर
ली है ,
विरासतों को तिलांजलि दे दी
है ,
अपनी उम्मीदों से मत लादो,
माँ मुझे मत बांधों |
मुझे नहीं बनना किसी साजन
की सजनी ,
न किसी राजन की रजनी ,
मुझे प्रेमी रहने दो ,
माँ मुझे मत बांधों |
छाती छुपाने के लिए दुपट्टा
ओढ़ लूँ,
ससुराल में सर ढ़क लूँ ,
मुझे किसी पिअरी से मत
बांधों ,
बोझिल सिन्दूर से मत लादो ,
माँ मुझे मत बांधों |
माँ क्यों तुम मुझे विदा
नहीं कर देती,
मेरी अरमानों के आँचल में ,
तारे टाक कर,विश्वास कर
लेती
मुझे स्वच्छंद नीलाम्बर
घोषित कर दो ,
माँ मुझे मत बांधों |
कुछ न दो ,बिंदिया ,बिछिये
से मत बांधों ,
दहेज़ की बोली से मत साधो
अरमानों से मत लादो
माँ मुझे मत बांधों |
