Wednesday, 19 October 2016

माँ मुझे मत बांधों


पैज़ेब ,पायल ,चूड़ियाँ तुमंने बना ली हैं ,

मुझे कंगनों  से मत लादो,

किसी स्वार्थी लक्ष्य से मत साधो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

माना कि मन मर्ज़ी मैंने कर ली है ,

विरासतों को तिलांजलि दे दी है ,

अपनी उम्मीदों से मत लादो,

माँ मुझे मत बांधों |

 

मुझे नहीं बनना किसी साजन की सजनी ,

न किसी राजन की रजनी ,

मुझे प्रेमी रहने दो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

छाती छुपाने के लिए दुपट्टा ओढ़ लूँ,

ससुराल में सर ढ़क लूँ ,

मुझे किसी पिअरी से मत बांधों ,

बोझिल सिन्दूर से मत लादो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

माँ क्यों तुम मुझे विदा नहीं कर देती,

मेरी अरमानों के आँचल में ,

तारे टाक कर,विश्वास कर लेती

मुझे स्वच्छंद नीलाम्बर घोषित कर दो ,

माँ मुझे मत बांधों |

 

कुछ न दो ,बिंदिया ,बिछिये से मत बांधों ,

दहेज़ की बोली से मत साधो

अरमानों से मत लादो

माँ मुझे मत बांधों |