हमारा प्रेम अब गतांक के
आगे का प्रेम हो चला है| जैसे एक प्रेमी या पति या पत्नी के साथ जो गत अनागत साल
के बाद का तलाक उसके बाद एक नयी शुरुआत यानी गतांक के आगे |......
पिछले दिनों मैं ‘द हिन्दू’
अख़बार में एक लेख पढ़ रही थी जो की इन दिनों तलाक के बढ़ते केस पर लिखी गई थी | भारत में रोजाना 100
डिवोर्स केस फाइल होते हैं | अमेंस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस
सालों में भारत में डिवोर्स के केस में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है| अजीब बात तो
यह हैं की यह केसेस घरेलु हिंसा या दहेज़ पताड़ना के कारण नहीं है | रिपोर्ट के
अनुसार ये केस लोगों में आपसी भरोसे के कम होने ,एक दूसरे के माँ बाप की ज्यादा
दखलांदाजी,या उनकी अवहेलना या अनादार करने के कारण बढ़ रहे हैं ,और सबसे बड़ा कारण कम अवधि के प्रेम के बलबूते अपना अवधपुरी बसाना
और वक़्त के साथ बेवक्त होते एगोइस्टिक झगड़े करना और क्या विरह यानी रिश्ते का स्वाः|
यह सच भी है . इन दिनों
मेरिटल अफेयर्स जैसे वाहियात शब्दों ने रिश्तों हो गंधौला कर दिया हैं . अपने आप
को देखिये हमारा प्रेम अब आशिकी 2 ,से 2 स्टेट होते हुए हाफ गर्लफ्रेंड हो चुका है
| प्यार प्राइड and प्रेज्यूडिस से होते हुए , लव हैपन्स ट्वाइस के रास्ते हेट
स्टोरी बन कर रह जाती है और हम कहते हैं “ I TOO HAD A LOVE STORY”. हमारे प्यार
का भी devaluation हो गया है .ऐसा लगने लगा है की हमारे रिश्तों में भी सावधान
इण्डिया,एकता कपूर का ड्रामा चल रहा हैं | सच में भारत में असहंसुत्ता बढ़ गई है और
कानूनों का इस्तेमाल होने लगा हैं |पीछले
दिनों हमारे चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के आँखों से पेंडिंग केसों ने आशुं निकाल
दिए और ऐसे ही लोगो के डाइवोर्स केस बढ़ते चले गए तो मुझे लगता है कुछ दिनों में सभी कोर्ट के जज भी रो देंगें |
दुनिया की छोड़िये क्या ऐसे लोगों को अपने बच्चों पर भी दया नहीं आती |नजाने क्या
हो रहा है हम ज्यादा पढलिख गए हैं, आज़ाद हो गए है या सभ्य बनकर सभ्यता की भयता बढ़ा
रहे हैं | टैगोर के जोगर बाली की प्रेमिका अब शायद दुनिया में कहीं नहीं रहीं.
धर्मवीर की सुधा और चंदर सा गुनाहों का देवता दुनिया में शायद ही कही हों , न हमरा
प्यार हमारा विश्वास हैं, न हमारी हिम्मत, और न विरह हमारी प्रेरणा | हमारा प्रेम
आज स्टेटस का मोहताज है, किसी मुकाम का मोहताज है, जो किसी मुकाम से शरू होता है
और किसी मुकाम पर जा कर खत्म हो जाता है | प्रेम तो कभी अकड़ की कहानी न थी,यहाँ तो
बस झुकाव ही झुकाव होता है .कोई शर्त नहीं होती ,न कोई स्वार्थ | सच में हम खोखले
हो गए हैं |
अब कोई कहा गाता है वह गीत
कि’’ बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने ,हमारी थोड़ी से बेवफाई ‘’|अब तो लोग अकसर “पिया न रहे
मनबसिया “गाते नज़र आते हैं | वाह रे दुनिया ! विरह को भी अपना व्हात्सप्प का
स्टेटस बना डाला | अनुभव के आँगन में आधुनिकता को जगह मिलनी चाहिए पर ये क्या? ऐसी
आधिनुकता का क्या फायदा की हम ही खोखले नज़र आयें . अपने रिश्तों को बनाते हुए
सोचिये ,वक़्त लीजिये , जरुरत पड़े तो थोड़ी अच्छी फिल्में भी साथ में देख लीजिये ,
कुछ किताबे झांक लीजिये, सफल जोड़ों की जिंदगी ताक लीजिये | विरह की तकलीफ महसूस कर
लीजिये अपने अच्छे दिनों को याद कर लीजिये | माँ बाप और दोस्ती दुनिया के तर्क और
वितर्क को तक्किय के नीचे डालिए| पैसे से
ज्यादा प्यार को तवज्जू दें क्यों कि हर चीज की एक लागत होती है और प्रेम की लागत
ज्यादा कुछ नहीं बस कुछ साल, दो मुठ्ठी
विश्वास हैं और गंतांत के आगे मिलने की ज़िद|
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