ठुल्ला थानेदार
सोचिये कल को केजरीवाल दिल्ली पुलिस को कुछ काम दें ,और सामने से जवाब में लिख
कर आये “ बाबा जी का ठुल्लू’’ या “ठुल्ला जी का ठुल्लू’’.
तो आलम कितना गजब का होगा न. केजरीवाल ने एक निजी चैनल के इंटरव्यू में दिल्ली
पुलिस को ठुला कहा है . तो इस मे गलत क्या होगा अगर दिल्ली पुलिस केजरीवाल को “
बाबा जी का ठुल्लू’’ पकड़ा दे.
कुछ भी हो यह शर्मनाक है . केजरीवाल ने शब्दों की गरिमा को लांग दिया है . हर
दुसरे तीसरे दिन वो किसी न किसी को भ्रष्ट्राचारी ,चोर ठुल्ला आदि बता देते हैं .
इससे मालूम होता है की उनकी शब्दिता से लिहाज और तमीज दोनों ही शब्द गायब हो गए
हैं .
दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच शुरू से ही टकराव है. केजरीवाल की मांग
है की दिल्ली पुलिस उनके अन्दर आ जाये पर संवैधानिक रूप से तो दिल्ली पुलिस
उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री और संसद के अन्दर आती है .
केजरीवाल का कहना एक हद तक सही भी है . हालही में हुई लड़की की मौत और पूरी
घटना में पुलिस की लापरवाही जरुर थी .दिल्ली में होते अपराधों की जिम्मेदारी उनकी
भी है.पर इसके लिए पुलिस वालों को ठुल्ला कहना एक मुख्यमंत्री के लिए अशोभनिय है .
केजरीवाल हमेशा से अपने आप को परम्परागत राजनीती के नेताओं से अलग बताते है.
शायद इसीलिए भी उनके निंदा करने का तरीका और शब्दों का चुनाव भी अतुल्यनिय है.
तो केजरीवाल को अब आगाह हो जाना चाहिए . कही ये ठुल्ले वक़्त वक़्त पे उन्हें “बाबा जी का ठुल्लू’’ न पकड़ा दें.
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