Sunday, 25 September 2016

शहाबुउद्दीन यानि - एके छप्पन, सैयां वीरप्पन ,बोल बा त मार देब गोली


        शहाबुउद्दीन यानि - एके छप्पन, सैयां वीरप्पन ,

                          बोल बा त मार देब गोली

शहाबुद्दीन जब जेल से निकाला तो बैकग्राउंड में बस इसी गाने की कमी थी |... एके छप्पन सैंया वीरप्पन  ,बोल बा त मार देब गोली .......बुआ कसम सच में क्या बमप्लाट सीन होता|

बारह साल बाद जब कोई कैदी जेल से निकलता है तो उसके चहरे पर कोई प्रायश्चित तो कम से कम होता ही है पर शहाबुद्दीन जेल से बाहर आया ऐसे ठसके से मानों संसद से सीधे दन दनाते चले आ रहे हों | मीडिया की मानें तो इस बाहुबली को लाने सौ सवा सौ गाड़ियाँ भी गयीं थी इससे पता चलता है कि बाहुबली बनाये नहीं जाते पालें जाते हैं |

शाहाबुद्दीन का नाम मई में सिवान के हिंदुस्तान ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या के बाद उछला और अब उनके रिहा हो जाने के बाद मेरे इस लेख में |लेख में एक छोटा सा सुलेख आपलोग ई जानिय कि राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारणी के सदस्य मोहम्मद शहाबुद्दीन को एक से लेकर दस साल तक की सजा ट्रायल कोर्ट सुना चुकी है | दो मामलों में आजीवन कारावास तक हुई पर अब उपरी अदालत में उसकी चुनौती के कारण फैसला वेटिंग लिस्ट में पड़ा है| फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने से पहले वो आज़ाद है | न्यायिक प्रक्रिया की स्पीड जितनी भी तेज हो पर मज़ा तो यह देखने में आयेगा कि लालू और नीतीश की इस प्रक्रिया में उंगली बाजी करने की स्पीडवा कितनी तेज़  होती है |

अजीब बात यह है कि  37 मामलों में शहाबुद्दीन के पेश न होने से ट्रायल शुरू नहीं हुआ पर हाई कोर्ट में एक के बाद एक मामले में जमानत शुरू होने लगी | शहाबुद्दीन जब अन्दर हुआ तो सत्ता में बीजेपी और जेडीयू थी और आज जब बाहर हुआ तो राजेडी और जेडीयू  और मुख्यमंत्री बोले तो अपन के नीतीश बाबू| जेल से निकलते ही लालू के सैंया वीरप्पन बोले लालू ही हमारे नेता है और होना भी तो चाहिए क्योंकि चोर चोर मौसेरा भाई |

बिहार की राजनीती यहीं समझ में आती है | अनन्त सिंह को नीतीश नहीं छोड़ते और शहाबुद्दीन को गिरिराज ,और उधर अमित शाह बनाम शहाबुद्दीन का एक और बकलोली मैच उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व बीजेपी खेल रही है| कुल मिलाकर शहाबुद्दीन बिहार की राजनीती में हिट चल रहे हैं| मुद्दा अभी और उछलेगा, नितीश और मूक रहें शायद पर प्रश्न यह है कि शहाबुद्दीन जो एक भयावह दौर का प्रतीक रहा है कोई अब यह नहीं देखेगा कि बिहार के मुसलमानों ने भी शहाबुद्दीन को गिरा ,लालू के ख़िलाफ वोट किया था अब सब यह भूलकर यही सोचेंगे कि नीतीश के तथाकथित मंगल में अब क्या नया जंगल होगा ? धुर्वीकरण की राजनीती अब किस ओर जाएगी? पर फ़िलहाल वही दौर याद आ गया ,’’ शहाबुद्दीन – यानि एके छप्पन सैंया वीरप्पन ,बोल ब त मार देब  गोली’’            

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