एक रात पढ़ कर, कई रात
जागतें हैं लोग
होतीं हैं ऐसी कुछ कहानियाँ
आह! कहने तक की फुरसत नहीं
देते
छोड़ जाती हैं बस कुछ
नादानियाँ |
हम बेअदब थे, अदब सीखा गईं
वो रवानियाँ
कहते रहें कुछ नहीं हुआ, हम
ठीक हैं
फिर भी बीमार कर गई वो
कहानियाँ |
जिनकी कीमत में आपके सालों
साल हों
एक पालें में खुद आप
हो
खेल जातीं हैं जिंदगी ऐसी
कुछ पालियाँ
निःशब्द कर देतीं हैं ऐसी
अनगिनत कहानियाँ |
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