"खो गया इनसान"
इन बड़ी -बड़ी इमारतो से , आगन खो रहा है
,इन बडे बडे अमीरो के बीच इंसानियत खो गई है ,इनसान खो गया है।
हमारे बगीचो से कोयल खो गई है,
अब हर घर मे कौआ बोल रहा है, इनसान खो गया है।
हमारी रजाई किसी के चादर मे खो गई है,
हमारी दुहाई दलिलो मे रो रही है,
आज हर कटघरे मे खड़ा है इनसान,हैवान सो रहा है,
आज इनसान खो रहा है।
तेरे घर मे,मेरे घर से ज्यादा आगज़ली तो नही,
तेरा घर भी मेरे घर की तरह किसी दंगे मे खो गया है,
आज इनसानियत मज़हबी दंगो मे शर्मशार हो रहा है
इनसान खो रहा है।
आज हर घर के कोने मे एक अस्तीत्वहीन निर्भया खड़ी है,
आज घर-घर मे दुर्योधन पैदा हो गया है ,इनसान खो गया है।
तेरे अल्लाह की माँग मेरे भगवान से बड़ी तो नही,
तेरा अल्लाह मेरा भगवान अमन की आस मे रो रहा है, इनसान खो रहा है।
तेरा दिल ,
मेरे दिल सा पत्थर तो नही,
तेरा खून ,मेरे खून से ज्यादा लाल तो नही,
तेरी मेँहदी का रंग मेरे सिँदुर से कम तो नही,
फिर क्यो मर गया तेरा -मेरा इमान,
उजाड़ दिये घर ,
कर दिया विरान,सो गया इनसान,
"खो गया इनसान"
इन बड़ी -बड़ी इमारतो से , आगन खो रहा है
,इन बडे बडे अमीरो के बीच इंसानियत खो गई है ,इनसान खो गया है।
हमारे बगीचो से कोयल खो गई है,
अब हर घर मे कौआ बोल रहा है, इनसान खो गया है।
हमारी रजाई किसी के चादर मे खो गई है,
हमारी दुहाई दलिलो मे रो रही है,
आज हर कटघरे मे खड़ा है इनसान,हैवान सो रहा है,
आज इनसान खो रहा है।
तेरे घर मे,मेरे घर से ज्यादा आगज़ली तो नही,
तेरा घर भी मेरे घर की तरह किसी दंगे मे खो गया है,
आज इनसानियत मज़हबी दंगो मे शर्मशार हो रहा है
इनसान खो रहा है।
आज हर घर के कोने मे एक अस्तीत्वहीन निर्भया खड़ी है,
आज घर-घर मे दुर्योधन पैदा हो गया है ,इनसान खो गया है।
तेरे अल्लाह की माँग मेरे भगवान से बड़ी तो नही,
तेरा अल्लाह मेरा भगवान अमन की आस मे रो रहा है, इनसान खो रहा है।
तेरा दिल ,
मेरे दिल सा पत्थर तो नही,
तेरा खून ,मेरे खून से ज्यादा लाल तो नही,
तेरी मेँहदी का रंग मेरे सिँदुर से कम तो नही,
फिर क्यो मर गया तेरा -मेरा इमान,
उजाड़ दिये घर ,
कर दिया विरान,सो गया इनसान,
"खो गया इनसान"
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