आख़री ख़त, उस मुहब्ब्त के नाम
मेरे प्रिय,
बिन मौसम बरसात जब कभी होती है,मेरे दरवाज़े पर तुम्हारे यादों कि खटखटाहट होती है| आज भी जब प्यार, मुहब्ब्त कि बात होती हैं तो,बनारस कि वो हमारी आखरी मुलाकात बाइस्कोप में चलती तस्वीरो कि तरह सामने आ जाती है | उफ़ यह सिदते मुहब्ब्त मिल जाये तो इससे बड़ी ख़ुशी नहीं और बिछड़े मुहब्ब्त से कही मुलाकात हो जाये तो उससे मुश्किल घड़ी नहीं | उस दिन भले ही तुम मुझसे दूर होगए , और मैंने भी हमारे इस फैसले में सर झुकाया था पर हामी नहीं भरी| आज हम दूर है एक दूसरे से, और शायद मेरे इस ख़त का अब कोई मतलब नहीं बनता पर सोचा कि जाने से पहले तुम्हें कमसेकम अपने मन कि बात कह दूँ|
कुछ गलतियाँ मुझसे हुई थी तो कुछ तुमसे ,तुमने कभी मुझसे कुछ कहा नहीं तो न मैंने कभी जाना| तुम दिमाग कि बात करते थे तो मैं दिल की| कल मै फ़िर वहीं गई थी,उसी चौराहें तक | मेरी नजरें कल भी तुम्हें ढूंढ़ रही थी पर हमेशा कि तरह मैं घर लौटी,तुम्हारे यादों के साथ|
पता है तुम्हें, तुम्हारी यादें भी तुम्हारी तरह ही निस्ठुर हैं,पूरी रात मैं सो नहीं पायी इसलिए नहीं कि वह यादें थी पर इसलिए क्योकि वह तुम्हारी यादें थी । तुम भले ही मुझे भूल गए होगे पर बिन मौसम बरसात जब कभी होती है,मेरे दरवाज़े पर तुम्हारे यादों कि खटखटाहट होती है| आज भी जब प्यार, मुहब्ब्त कि बात होती हैं तो,बनारस कि वो हमारी आखरी मुलाकात बाइस्कोप में चलती तस्वीरो कि तरह सामने आ जाती है | उफ़ यह सिदते मुहब्ब्त मिल जाये तो इससे बड़ी ख़ुशी नहीं और बिछड़े मुहब्ब्त से कही मुलाकात हो जाये तो उससे मुश्किल घड़ी नहीं | उस दिन भले ही तुम मुझसे दूर होगए , और मैंने भी हमारे इस फैसले में सर झुकाया था पर हामी नहीं भरी| आज हम दूर है एक दूसरे से, और शायद मेरे इस ख़त का अब कोई मतलब नहीं बनता पर सोचा कि जाने से पहले तुम्हें कमसेकम अपने मन कि बात कह दूँ|
कुछ गलतियाँ मुझसे हुई थी तो कुछ तुमसे ,तुमने कभी मुझसे कुछ कहा नहीं तो न मैंने कभी जाना| तुम दिमाग कि बात करते थे तो मैं दिल की| कल मै फ़िर वहीं गई थी,उसी चौराहें तक | मेरी नजरें कल भी तुम्हें ढूंढ़ रही थी पर हमेशा कि तरह मैं घर लौटी,तुम्हारे यादों के साथ|
सुनाई देती है यादें,दिल से कान लगा कर देखो,
सुनाई देंगी वह यादें,किताब से तस्वीर निकाल कर देखो,
सुनाई देती है यादे,अपने कमरे के दरवाज़े पर देखो ,
सुनाई देंगी वह बातें ,मेरी कब्र पर जाके देखो ,
दिखाई देगा वह प्यार,इस बरसात में भींग कर देखो,
मैं खड़ी हुँ वहीं जहाँ तुम मुझे छोड़ कर गये थे , बनारस के उसी घाट पर
हर मौसम में सुनायी देंगी वह यादें,मेरी आख़री ख़त पढ़ कर देखो |
फिर मिलेंगे,अलविदा|
तुम्हारी प्रिय,
मुहब्ब्त |
kabhi kabhi na chahte huye bhi humein unse dur hona padta hai jinse hum beintehaan pyar kerte hain..per shayad yahi jindagi hai...
ReplyDelete