Tuesday, 25 March 2014

aakhri khat,us muhabbt ke naam


                                                   आख़री ख़त, उस मुहब्ब्त के नाम



मेरे प्रिय,
                        
            बिन मौसम बरसात जब कभी होती है,मेरे दरवाज़े पर तुम्हारे यादों कि खटखटाहट होती है| आज भी जब प्यार, मुहब्ब्त  कि बात होती हैं तो,बनारस कि वो हमारी आखरी मुलाकात बाइस्कोप में चलती तस्वीरो कि तरह सामने आ जाती है | उफ़ यह सिदते मुहब्ब्त मिल जाये तो इससे बड़ी ख़ुशी नहीं और बिछड़े  मुहब्ब्त  से कही मुलाकात हो जाये तो उससे मुश्किल घड़ी नहीं | उस दिन भले ही तुम मुझसे दूर होगए , और मैंने भी हमारे इस फैसले में सर झुकाया था पर हामी नहीं भरी| आज हम दूर है एक दूसरे से, और शायद मेरे इस ख़त का अब कोई मतलब नहीं बनता पर सोचा कि जाने से पहले तुम्हें कमसेकम अपने मन कि बात कह दूँ|
      कुछ गलतियाँ मुझसे हुई थी तो कुछ तुमसे ,तुमने कभी मुझसे कुछ कहा नहीं तो न मैंने कभी जाना| तुम दिमाग कि बात करते थे तो मैं दिल की| कल मै फ़िर वहीं गई थी,उसी चौराहें तक | मेरी नजरें कल भी तुम्हें ढूंढ़ रही थी पर हमेशा कि तरह मैं घर लौटी,तुम्हारे यादों के साथ|
पता है तुम्हें, तुम्हारी यादें भी तुम्हारी तरह ही निस्ठुर हैं,पूरी रात मैं सो नहीं पायी इसलिए नहीं कि वह यादें थी पर इसलिए क्योकि वह तुम्हारी यादें थी । तुम भले ही मुझे भूल गए होगे पर
             सुनाई देती है यादें,दिल से कान लगा कर देखो,
                        सुनाई देंगी वह यादें,किताब से तस्वीर निकाल कर देखो,
                    सुनाई देती है यादे,अपने कमरे के दरवाज़े पर देखो ,
                    सुनाई देंगी वह बातें ,मेरी कब्र पर जाके देखो ,
                    दिखाई देगा वह प्यार,इस बरसात में भींग कर देखो,
मैं खड़ी हुँ वहीं जहाँ तुम मुझे छोड़ कर गये थे , बनारस के उसी घाट पर
 हर मौसम में सुनायी देंगी वह यादें,मेरी आख़री ख़त पढ़ कर देखो |
फिर मिलेंगे,अलविदा|   
तुम्हारी प्रिय,
मुहब्ब्त |   

1 comment:

  1. kabhi kabhi na chahte huye bhi humein unse dur hona padta hai jinse hum beintehaan pyar kerte hain..per shayad yahi jindagi hai...

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