प्रिय,
यूँ तो मेरी गलियों में आज भी आवारा
आशिकों की कमी तो नहीं है,पर तुम जैसा इस दुनिया में कोई दूजा आशिक शायद न कोई था
और न होगा.यूँ तो लोग मेरी गंभीर शक्ल और तमतमाते गुस्से से देखकर ही मुझ से बाते
करने तक की रिस्क नहीं उठाते पर तुम्हारी हिम्मत की तो मैं भी कायल हो गयी हूँ .
वाह!तुम्हारा यूँ मेरे
बगीचे में छुपे रहना और शाम होते ही बिना किसी फिक्र के मेरी खुली हुई खिडकियों से
बिन पूछे मेरे कमरे में घुस जाना तुम्हारी आवारा हरकतों पर पक्के आशिकों का मुहर
लगाता हैं. हद तो तुम सर्दियों में कर
देते हो जब सबके सामने तुम सीधे दिन दहाड़े दरवाजे से आकर मेरी अलमारी और पलंग के
निचे छुप जाते हो.पता है तुम्हे, कई बार तो माँ ने भी तुम्हे आते देख लिया था तभी
तो रोज रात वह तुम्हारी अच्छी धुलाई करवाती थी.
मुझे तुम्हे यूँ मार खाते हुए देखकर कभी कबार तो बुरा लगता था पर एक बार जब
तुम्हारी वजह से मुझे १० दिनों तक बुखार में रहना पड़ा तो कही न कही तुम्हारे दुःख
से मुझे भी ख़ुशी मिलती थी .मुझे याद है कि तुम्हारे प्रकोप से बचे रखने के लिए तो
मा ने मुझे दूसरे कमरे में भी शिफ्ट कर दिया था पर तुम तब भी ना माने .तुम तब भी
अपने आवारा साथियों के साथ मुंह उठाये चले आते थे .सबसे बड़ा गुस्सा तो मुझे तुम पर
तब आया था जब तुम्हारे एक साथी’’एडिस’’ से लड़ाई के समय मेरा भाई घायल हो गया था. तुम्हारे उस दोस्त ने तो मेरे
गबरू जवान भाई को भी बिस्तर पर कुछ दिनों के लिए पहुंचा दिया था.
सच पूछो तो तुम्हारे काम के
प्रति,तुम्हारी निष्ठा का सही अंदाजा तब हुआ जब हमने अपना घर बदल दिया पर हम तुमसे
निज़ात न पा सके .उस दिन उस नए कमरे में जहाँ की दीवारे भी ,मुझे नहीं पहचानती थी
वहां तुम्हारे सुरीले गानों की दस्तक और
तुम्हारे आने से मेरे कमरे में,मेरे पुराने कमरे जैसी रौनक लग गयी थी.उस दिन के
लिए तुम्हे दिल से शुक्रियां.
देखो अब जो मैं तुम्हे कहने जा रही हूँ ,उसे सुनकर तुम्हे बुरा
ही लगेगा पर यह सच है.सुनो अब मैं बीस
साल की हो गयी हूँ,और अब मुझे तुम्हारा खेल खेल में काटकर रशेस करना मुझे अच्छा नहीं
लगता .अब तुम मेरे कमरे से खुद ब खुद ही निकल जाओ नहीं तो तुम्हे,तुम्हारे औकाद
मुझे याद दिलानी पड़ेगी .तुम उम्र के साथ
और भी आवारा होते जा रहे हो की तुमने तो
मेरी २ साल की भतीजी को भी नहीं छोड़ा.पता है तुम्हारी बदमाशियों की वजह से कल रात
वो कितना रो रही थी.सुनो मैं तुम्हे दिल
से दुआ देकर अपने कमरे से विदा करना चाहती हूँ न की काला हिट और रैकेट से मारकर.सो
अब मेरे प्रिय आवारा आशिक मच्छर महोदय आपसे मेरा विनम्र निवेदन है कि मेरी
परेशानियों को समझते हुए, मुझे हर रात चैन की नींद प्रदान करे नहीं तो जरुरत पड़ने
पर जरुरी कारवाही की जाएगी.
सो मेरे प्रिय,अब कह भी दो
अलविदा,सुना है अलविदा कहने से फिर मिलने की उमीद कम हो जाती है|
अलविदा,
तुम्हारी प्रिय ‘’पल्लव’’.
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