ऐ जिंदगी, तुझे चाहने की
कोई खास बात तो नहीं ,
बस तेरे अँधेरी गलियों में
खोने का ,मजा आ रहा है ,
ऐ जिंदगी ,तुझे जीने की कोई
खास चाहत तो नहीं ,
बस तुझे जानने का हुनर आ
रहा है ,
ऐ जिंदगी, तेरी जमी मुझे
कुछ खास भा तो नहीं रही,
पर तेरे आसमां में, उड़ने का
जज्बा आ रहा है .
ऐ जिंदगी, तेरी राहों में चलने की राहत तो
नहीं ,
पर इन राहों के घाव,मेरे
सपनों की किमत बता रहा है .
ऐ जिंदगी ,तेरी इबादत में
कोई यकीं तो नहीं ,
पर कुछ पल के लिए तेरे सजदे में सर, झुका जा
रहा है.
ऐ जिंदगी ,तेरे उजालों में
कोई खास रोशनी तो नहीं,
पर एक पल के लिए ही सही
,दिल डरा जा रहा है .
ऐ जिंदगी, तेरी कहानियों
में कोई शोर तो नहीं,
पर अपना ही सही,शोर सुना जा
रहा है .
ऐ जिंदगी, तेरे मजाक में कोई हंसी तो नहीं,
पर फिर भी ये व्यंग,सहा जा
रहा है.
ये जिंदगी, तेरी मौत में
कोई शांति तो नहीं ,
पर शांति का ढोंग,ये ज़माना
रचा जा रहा है .
ऐ जिंदगी तेरे काटों से सुख
तो नहीं,
पर फिर भी,उन फूलो से
,बेबाक मुहब्बत करा जा रहा है,
ऐ जिंदगी, तुझे जीने की कोई
खास चाहत तो नहीं ,पर चला जा रहा है.
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