Monday, 18 August 2014

parichaya jindagi se


ऐ जिंदगी, तुझे चाहने की कोई खास बात तो नहीं ,

बस तेरे अँधेरी गलियों में खोने का ,मजा आ रहा है ,

ऐ जिंदगी ,तुझे जीने की कोई खास चाहत तो नहीं ,

बस तुझे जानने का हुनर आ रहा है ,

ऐ जिंदगी, तेरी जमी मुझे कुछ खास भा तो नहीं रही,

पर तेरे आसमां में, उड़ने का जज्बा आ रहा है .

   ऐ जिंदगी, तेरी राहों में चलने की राहत तो नहीं ,

पर इन राहों के घाव,मेरे सपनों की किमत बता रहा है .

ऐ जिंदगी ,तेरी इबादत में कोई यकीं तो नहीं ,

  पर कुछ पल के लिए तेरे सजदे में सर, झुका जा रहा है.

ऐ जिंदगी ,तेरे उजालों में कोई खास रोशनी तो नहीं,

पर एक पल के लिए ही सही ,दिल डरा जा रहा है .

ऐ जिंदगी, तेरी कहानियों में कोई शोर तो नहीं,

पर अपना ही सही,शोर सुना जा रहा है .

   ऐ जिंदगी, तेरे मजाक में कोई हंसी तो नहीं,

पर फिर भी ये व्यंग,सहा जा रहा है.

ये जिंदगी, तेरी मौत में कोई शांति तो नहीं ,

पर शांति का ढोंग,ये ज़माना रचा जा रहा है .

ऐ जिंदगी तेरे काटों से सुख तो नहीं,

पर फिर भी,उन फूलो से ,बेबाक मुहब्बत करा जा रहा है,

ऐ जिंदगी, तुझे जीने की कोई खास चाहत तो नहीं ,पर चला जा रहा है. 

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