Saturday, 16 August 2014

TALASH EK NAYI SUBH KI


नजाने कितना वक़्त बीत गया,कुछ शाम ऐसी महसूस होती है जैसे मानो तुम अभी आओगी और कहोगी ‘’क्या मुकुल,तुम अभी भी यहीं खड़े हो,अभी तक फ्रेश नहीं हुए ,तुम कितने आलसी हो गए हो.’’

कितना निस्वार्थ था न तुम्हारा प्यार मेरे लिए,कितनी मर्माहत थी तुम्हारे उन सवालो में ,वो तेरा बातो बातो में ही गुस्सा  हो जाना ,फिर अगले ही पल किसी बहाने एक सौरी के साथ गलती मान जाना .कितनी अजीब थी न तुम! और तुम्हारे सवाल भी.मुझे आज भी याद है की एक तरफ तुम्हारा वो एंग्री वीमेन वाला लुक,और दूसरी तरफ बिन मांगे ही मदत कर देना .शायद  मुझे तुम्हारे इसी सख्त स्वभाव से प्यार हुआ था और शायद तुम्हारी वही स्वाभाव और आत्मसमान आज हमारे बिच की सबसे बड़ी दूरी है.

  मुझे आज भी याद  है कि हमारी शादी तुम्हारे आत्मसम्मान बनाये रखने की शर्त पर हुयी थी,पहले तुम्हे मेरे लिए डाइनिंगटेबल पर बैठ देर रात इंतजार करते देख अच्छा लगता था ,पर फिर मेरी अनदेखी ,मेरा बदता स्वभाव,मेरा घंटो काम करना तुम्हारे और मेरे बिच की ख़ामोशी कब बन गयी मुझे इस बात का कभी अहसास भी न हुआ .

पर अब अहसास है,तुम्हारे दूर जाने की,मैं यह नहीं कहता  की तुम गलत हो और मैं  सही. पर गलतियाँ  तुमसे भी हुयी थी और कुछ मुझसे भी .मैं  जनता हु कि तुम बहुत स्वाभिमानी हो ,स्ट्रोंग हो और शायद कभी न माफ करने वाली गलती की सजा तुम्हारा मुझे यु छोड़ जाना है.पर इन सबके बाबजूद मैं एक नया ख्वाब देखना चाहता हूँ,चाहता हूँ कि तुम मेरी मुहब्बत फिर बन आओ,लौट आओ क्युकि तुम मेरी  पहली और आखरी मुहब्बत हो .  यह कहने की फिर से गुस्ताखी करना चाहता हूँ  कि तुम्हारी आँखे आज भी मेरी खबर रखती है और दिल चाह कर भी मुझे इग्नोर  नहीं कर पता,तो क्या तुम  अपने दिल की सुन कर मेरे साथ नहीं चल सकती,    क्या हम दोनों साथ  मिलकर नहीं कर सकते ‘’फिर से एक नयी सुबह की तलाश . 

2 comments:

  1. it hurts when the person who treated u so nicely..suddenly starts taking u for granted..!!

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