एक शाम जब मैं अपने कमरे
में बैठकर सोच रही थी कि नजाने कितना वक़्त बीत गया कभी अकेले शांति से अँधेरे में
बैठे हुए,की तभी मेरे कमरे की लाइट चली गयी| एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा की शायद
मुद्दतो बाद मैंने कुछ दिल से माँगा है,तभी ऊपर वाले ने मेरी इच्छा पूरी कर दी है|
उस वक़्त मैंने बहुत वक़्त
बाद परम शान्ति का अनुभव किया,ऐसा लगा की जैसे मानो मैं किसी खुले आसमान में आ गयी थी| जहाँ अँधेरे के बावजूद ,एक
रोशनी काम कर रही थी,और वह रोशनी थी अपने मन की|वहां शांति के बाद भी शोर था,शोर
अपने धडकनों की.घडी की पल पल के सफ़र की मैं प्रत्यक्षदर्शी थी | वाह!क्या शोर था
वह| बिलकुल अलग जहाँ अपने मन की बातों की खुसफुसाहट,खुद को ही सुनाई पड़ रही थी.
जहाँ दिमाग और दिल के बिच
एक संवाद चल रहा था|दिल कह रहा था’’देखो आज पल्लव,कितनी खुश हैं ,तभी आज हमसे
मिलाने आई हैं |’’वही दिमाग कह रहा था ‘’हो गयी न तुम भावुक ,ओये पल्लव कोई खुशी
से नहीं,किसी टेंशन के कारण अकेले बैठी हैं|’ ’तो दिल ने प्रेम से दिमाग से
कहा:खुशी का पता तो नहीं पर वह शांत हैं
,क्युकी इन्सान अपने आप को तभी सुनता है जब वह शांत और संतुष्ट होता हैं,कि
तभी दिमाग बोल पड़ा:हा,हा,हा पल्लव और संतुष्ट,कभी नहीं,वह एक लालची लड़की है
,जिंदगी उसे जो भी दे,वह और की ही मांग करती है |’’ मैं देर तक दिल और दिमाग के
बिच का संवाद सुनती रही और कुछ देर बाद ही मेरी आँख लग गयी |
मैंने देखा की मैं एक बगीचे
में थी जहाँ वसंत का आगमन हो चुका था |हर तरफ हरे हरे पेड़ पौधे खुशी से झूम
रहे थे ,हर डाली कलियों से भरी हुयी थी,पंछी उड़ रहे थे|उनकी आवाज में नए मौसम के
आगाज की चहचहाहट थी| पर अचानक अगले ही पल
हवाओं का वेग तेज हो गया ,उन हवाओं में
जहाँ पेड़ की हर पल्लव हिल गयी थी वहां यह कुछ पल्लव बची थी| लगा जैसे कि उन वसंती
हवाओ में पतझरी हवाए चलने लगी और बचे हुए पल्लव भी टूट गए|
अचानक मेरी आँख खुली ,मैंने
पाया कि लाइट आ चुकी थी.पर अभी भी मेरी आँखों में वह सपना था और कुछ प्रश्न. जहाँ
,एक पल पूरा पेड़ हरा था वही दूसरी पल वह पिला कैसे हो गया? एक पल जहाँ तेज हवाओं
में वही पल्लव झूम रहे थे ,वही दूसके पल उन्ही हवाओं में वह टूट कर कैसे बिखर
गए थे?
शायद इन सबका जवाब मैं
जानती थी, पर मानती नहीं हूँ क्युकी................
This all things happens just because of scientific reasons, और अगर यह मेरे बारे में था तो, मैं पल्लवी हूँ,जो जिद्दी और लालची है और यह लाइट
जाने से मुझे शांति नहीं मिली बल्कि बस काम न करके सोने का बहाना मिल गया. और
हमारे इस मुख्यमंत्री को वोट न देने का कारण|
Its a nice story, a very nice effort pallavi. Its interesting to read and also is containing a message. Dil aur dimaag ke dvanda ko achi tarah se prastut kia hai aapne
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